झुटो का मोहला

एक बुजुर्ग ने अपने मुरीदो से कहा कि-
में फला सहर में जाता हूं और झुटो के मोहले में रहा करूँगा। अगर तुम मुझसे मिलने आओ तो झुटो के मोहले ने आ जाना। वह बुजुर्ग उस सहर में चले गए और झुटो के मोहले में रहने लगे । कुछ दिनों के बाद उनके चंद मुरीद उनसे मिलने गए और लोगो से पूछना शुरु किया कि झुटो का मोहला कोनसा हे। लोग हैरान होकर जवाब देते क्या तुम पागल हो? तिमहार दिमाग खराब है ? इस सहर में कोई झुटो का मोहला नहीं है और यहाँ भी नहीं हो सकता कि सारे झुटे एक जगह आके रहने लगे । आखिर वह लोग हार -लाचार बेउमीद होकर सहर के एक किनारे पर कब्रिस्तान में जा निकले तो क्या देखते है कि पीर साहब वहा बेठे हे । मुलाकात के बाद उनसे पूछा गया कि हजरत ! लोगों ने हमको खूब पागल बनाया और सहर में किसी ने झुटो का मोहला नहीं बताया।
यहाँ बात सुनकर उन बुजुर्ग ने फ़रमाया-
की देखो! यह कब्रिस्तान झुटो का मोहला ही तो हे । यहाँ के रहने वाले सब झूट ही तो कहते थे कि-
यह मेरा गांव हे। यह जमींन मेरी हे । यह मकान और दुकान मेरी हे ।यह बाग और जायदाद मेरी हे। यह समांन और मॉल मेरा हे। यह गाय, भेस,उट,बकरी, मेरी हे। यह ट्रक और बर्तन , जेवर,कपडे मेरे हे। बतलाओ आज इनके पास तुम कोई चीज देखते हो । तो इनके सब दावे झुटे थे ।इस लिए कब्रिस्तान झुटो का मोहला हुवा या नहीं? मुरीदों को बड़ी इबरत हासिल हुवी और उन्होंने कहा-
हजरत बिलकुल सही बात है । और सब के सब अल्लाह व् रसूल के फारमाबरदार बन गए और मॉल दौलत अल्लाह के रह में खर्च करने लगे। ए अजीज भाई ! तू भी सबक हासिल कर और अल्लाह व रसूल का ताबेदार बन।
दिसतो जिंदगी का कोई भरोसा नहीं कब मोत आ जाये इसलिए अपने आमाल अछे कर ले

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